तालियों से गूंजा सभागार, बड़ी संख्या में श्रोता हुए शामिल
सूफी भक्ति संगीत का एक रूप है: लखविंदर वडाली
मंगलसेन सभागार में हुई म्यूजिकल नाइट में सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपने गीत-संगीत से समा बांध दिया। लखविंदर द्वारा प्रस्तुत किए गए गीत व संगीत से लोग झूमने को विवश हो गए। इस कार्यक्रम को देखने हरियाणा-पंजाब एवं आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। लोगों ने कार्यक्रम का जमकर लुफ्त उठाया। लखविंदर वडाली ने पंजाबी और सूफी संगीत में अपने लिए एक अलग पहचान बनाई है। 2004 में आई उनकी एल्बम बुल्ला से लेकर इश्का और रंगी गई जैसे उनके दिल को छू लेने वाले पंजाबी गानों तक, लखविंदर के गानों ने हर जगह संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लिया है।
मंच-संचालन रेडियो जॉकी रॉकी ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किया जो अपने विषय की जानकारी, भाषा पर अधिकार, भाव-प्रवणता, भाव-भंगिमा, स्वष्टता एवं प्रवाहपूर्णता के लिए जाने जाते हैं।
ज्ञात रहे लखविंदर वडाली एक भारतीय संगीतकार और गायक हैं, जो भारत के पंजाब के संगीतकारों के परिवार से हैं। उनके दादा ठाकुर दास वडाली एक प्रसिद्ध गायक थे और उनके पिता और चाचा ने वडाली भाइयों की एक सूफी कव्वाली जोड़ी बनाई थी। लखविंदर ने अपने पिता पूरन चंद वडाली से शास्त्रीय संगीत में व्यापक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनके गीतों में संगीत में शास्त्रीय और वर्तमान रुझान का मिश्रण है। उनके प्रदर्शनों की सूची में सूफी संतों, रोमांटिक , लोक संख्या, ग़ज़ल , भजन और भांगड़ा की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। अलाप और तान उनके संगीत के महत्वपूर्ण पहलू हैं। पद्म श्री पूरन चंद वडाली के बेटे, लखविंदर वडाली अपने आधुनिक सूफी गीतों के साथ वडाली ब्रदर्स की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यकर्म का प्रबंधन योगेश द्वारा किया गया। इस मौके पर नीतीश कुमार, मनोज कोचर, जस्सी वडाली, चिराग आदि भी उपस्थित रहे।
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