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जालंधर: श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले में दर्शन करने पहुंचे राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया।

Director : Manvir Singh Walia 

Editor : Jatin Kumar Sahota 

जालंधर, 25सितंबर : Prime Punjab 

जालंधर: श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। हर साल अनंत चतुर्दशी के अवसर पर यहां बड़े मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा सोढल का आशीर्वाद लेने और मन्नतें मांगने पहुंचते हैं। वहीं प्रसिद्ध बाबा सोढल मेले में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया पहुंचे। उन्होंने बाबा सोढल मंदिर में नतमस्तक होकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया। राज्यपाल मेले की शुरुआत से पहले आयोजित पूजा में भी शामिल हुए और पूजा में बैठकर विधिवत हिस्सा लिया।

इस दौरान उनके साथ मंदिर के चेयरमैन शीतल विज सहित मंदिर कमेटी के तमाम सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए करीब 1500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही भीड़ पर नियंत्रण रखने और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है। यह धार्मिक उत्सव सदियों पहले चड्ढा और आनंद परिवार द्वारा शुरू किया गया था। मेले से एक दिन पहले ही इन परिवारों के सदस्य मंदिर परिसर में एकत्र होते हैं। समय के साथ यह रीत अब एक परिवार या बिरादरी तक सीमित न रहकर पूरे समाज की आस्था में बदल चुकी है।

आज हर कौम के लोग यहां आकर शीश झुकाते हैं। श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना माना जाता है। पुरानी कथाओं के अनुसार, जिस स्थान पर आज भव्य मंदिर बना है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था और एक छोटा सा तालाब था। तालाब के पास एक संत कुटिया बनाकर तपस्या करते थे। मान्यता है कि बाबा सोढल के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर भक्त बाबा को रोट (विशेष प्रसाद) या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं। यहां प्रसाद वितरण से जुड़ी एक बेहद अनोखी और स्थानीय परंपरा निभाई जाती है। बाबा सोढल को चढ़ाया गया प्रसाद केवल घर की बेटी ही ग्रहण कर सकती है। बेटी के पति (दामाद) और उसके बच्चों को यह प्रसाद देने की परंपरा नहीं है।